भादवा की चौथ माता की कहानी। Bhadwa Ki Chauth Mata Ki Katha

इस बार 15 अगस्त 2022, दिन सोमवार को भाद्रपद महीने में – बहुला चतुर्थी या भादुड़ी संकष्टी चतुर्थी (Bhadwa Chaturthi) को व्रत किया जाएगा। चंद्रोदय समय: रात 09:46 बजे रहेगा। इस दिन भगवान श्री बिंदायक और चौथ माता की पूजा व व्रत किया जाता है। भादवा की चौथ को भादुड़ी चौथ या बहुला चौथ भी कहा जाता है और इस दिन भादुड़ी चौथ माता की कहानी भी सुनी जाती है। इसके साथ ही बिंदायक जी की कहानी सुनी जाती हैं। स्त्रियां इस व्रत को अपने सुहाग और पति की लंबी आयु के लिए करती हैं।

|| भादवा की चौथ माता की कथा ||

एक बुढ़िया माई के ग्वालिया-बछालिया नाम का बेटा था। बुढ़िया माई बेटे के लिए बारह महीने की चारों चौथ करती। बेटा लकड़ी लाता और दोनों मां-बेटा उनको बेचकर गुजारा करते थे। बुढ़िया माई रोजाना लकड़ी में से दो लकड़ी रख लेती और चौथ के दिन बेटे से छुपकर बेचकर सामान लाती और पाँच पुआ बनाती। एक पुआ गणेशजी, एक चौथ माता को चढ़ाती, एक ब्राह्मण को देती, एक आप खाती, एक बेटे को खिलाती। एक चौथ के दिन बेटा अपनी पड़ोसन के घर गया वो पुआ बना रही थी,

जब उसने पूछा कि आज क्या है जो पुए बना रखे हैं? तब वो बोली, मैंने तो आज ही बनाए है पर तेरी मां तो चारों चौथ को पुए बनाती है ? उसने जाकर मां से पूछा, मां तू रोज पुए बनाती है, मैं इतनी मेहनत से कमाता हूँ। बुढ़िया माई बोली, मैं तो चौथ माता का व्रत करती हूँ। वो बोला कि तू मुझे रख ले या चौथ माता को ही रख ले।

बुढ़िया माई बोली, मैं तो तेरे लिए ही चौथ करती हूँ, सो मैं तुझे छोड़ सकती हूँ, पर चौथ माता को नहीं। जब बेटा घर से जाने लगा तो बुढ़िया माई बोली, तू जा रहा है तो मेरे हाथ में से ये आखा ले जा जहाँ संकट आए वहाँ ही पूर देना। बेटे ने सोचा, बात तो झूठी है पर ले चलने में क्या बुराई है। चलने लगा तो थोड़ी दूर पहुँचा तो देखा खून की नदी बह रही थी, कहीं से भी रास्ता नहीं मिला तो आखे पूर कर बोला कि चौथ माता अगर तू सच्ची है तो रास्ता हो जाए, झट रास्ता मिल गया। आगे गया तो घनघोर अंधेरा व उजाड़ फैल रहा था।

उसने मन में सोचा कि मुझे शेर, बघेरो खा जाएगा। आखा पूर कर बोला, चौथ माता मुझे रास्ता मिल जाए, जल्दी से रास्ता मिल गया। आगे चला, जाते-जाते एक राजा की नगरी में पहुँचा, वो राजा एक आदमी की बलि देता था। एक बुढ़िया माई के पास गया।

बुढ़िया माई रोती जा रही थी और पुए बनाती जा रही थी। वो बोला, तू क्यों रो रही है। जब वो बोली कि मेरे एक ही बेटा है जिसकी कल बलि चढ़ जाएगी, उसी के लिए पुए बना रही हूँ। वह बोला, अपने बेटे के बदले पुए मुझे खिला दे मैं राजा की बलि चढ़ने के लिए चला जाऊँगा।

माई ने पुए खिला दिए। राजा का संदेशा आया तो माई ने सोचा कि दूसरे के बेटे को मैं कैसे भेज दूँ पर शोर सुनकर उसकी आँख खुल गई, वो राजा के आदमियों के साथ चला गया। उन सबने मिलकर उसे हाव में चुन दिया तो वो आखा पूर कर हाव में बैठ गया। तीन दिन में ही हाव पक गया। हाव के पास बच्चे खेल रहे थे, उसमें से आवाज आई।

बच्चों ने राजा को जाकर कहा कि आपका हाव तो पक गया । राजा ने सोचा कि हाव तो आठ दिन में पकता था। आज तीन दिन में कैसे पक गया। जाकर देखा तो सोने-चाँदी के कलश हो गए, अन्दर से आवाज आई, धीरे से उतारो अन्दर आदमी है। राजा के आदमी डर गए कि अन्दर कौन-सा भूत-दैत्य आ गया। जब वो बोला, मैं तो वही आदमी हूँ जिसे तुमने चुना था। देखा तो अन्दर हरे-हरे ज्वारे उग रहे थे। उसको राजा के पास ले गए।

राजा ने पूछा, तू कैसे बच गया तो वो बोला, मेरी मां मेरे लिए चौथ का व्रत करती थी। जब मैं रवाना हुआ तो उसने मुझे आखे दिए, सो मैं वही आखे पूर कर बैठ गया जिससे बच गया। राजा बोला, एक घोड़े पर तू बैठ जा, तेरे सांकल बंधी रहेगी जो खुलकर मेरे बंध जाएगी तो मैं चौथ माता को सच्ची मानूँगा।

वो आखे पूर कर बोला, चौथ माता अब तू ही लाज रखना, झट सांकल खुल कर राजा के बंध गई। राजा ने अपनी बेटी की शादी उसके साथ कर दी और खूब धन देकर विदा किया। पड़ोसन बोली, माई तेरे बेटे-बहू आए हैं। छत पर चढ़कर देखा तो सचमुच में बेटे-बहू आ रहे थे।

हे चौथ माता ! जैसे तू बुढ़िया माई और उसके बेटे को टूटी वैसे ही सब पर टूटना। कहता न सुनता न हुकारा भरता न अपना सारा परिवार न टूटियो ।

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